पेटेंट क्या है?

पटेंट एक्सव अधिकार है जो कि नए अविष्कार के लिए राज्य प्रदान करता है।
अविष्कार की प्रथम पूर्ण एवम सही घोषणा करने के एवज में राज्य निश्चित अवधि के लिए पेटेंट देते हैं।

राज्य(सरकार) को नए अविष्कार की जानकारी मिल जाती है व पेटेंट धारक को निश्चित अवधि के लिए एक्सव अधिकार |

क्या कंप्यूटर प्रोग्राम को पेटेंट किया जा सकता है?

कं‍प्यूटर प्रोग्राम, औद्योगिक प्रक्रिया के साथ हो तो उसे पेटेंट कराया जा सकता है कि नहीं, इस सम्बन्ध में सबसे चर्चित और शायद सबसे विवादित मुकदमा डार्ह केस (Diamond Vs. Diehr, (1981) 450 U.S.. 175: 67 L.E.D. 2d घ/55) है। इस मुकदमे में जिस आविष्कार को पेटंट कराया जा रहा था उसमें कं‍प्यूटर प्रोग्राम को रबर साफ करने की एक प्रक्रिया के साथ प्रयोग किया गया था। रबर को साफ करने के लिये उसे गर्म किया जाता है उसे कितनी देर गर्म किया जाय यह उसके तापमान पर निर्भर है तापमान ज्यादा तो कम समय के लिये गर्म किया जायेगा यदि तापमान कम तो ज्यादा समय के लिये गर्म किया जायेगा यह आर्हेनियस नियम के अनुसार निश्चित होता है। जिस ढांचे के अन्दर रबर को गर्म किया जाता था उसके अन्दर के तापमान को कंप्यूटर में डाला जाता था जो आर्हेनियस नियम के अनुसार समय की गणना करता था और ठीक समय ढांचे को खोल देता था ताकि रबर बाहर आ जाये। सवाल यह था कि क्या यह आविष्कार था जिसका पेटें‍ट कराया जा सकता है।

पी सी टी

Patent Cooperation Treaty 1970 (P.C.T. या पी.सी.टी.) पेटेंट के लिये आवेदन पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में सुविधा प्रदान करती है। यह पेटेंट के लिये आवेदन पत्र का मानकीकृत फॉरमैट बताती है और इसके साथ उन्हे दाखिल करने की केन्द्रीयकृत सुविधा भी देती है। भारत ने इसके अनुच्छेद 64 के उप अनुच्छेद 5 के अलावा‚ इसे7-12-98 को स्वीकार किया है।

पेटेंट किन अविष्कारों के लिए दिया जाता है?

पेटेंट नए प्रक्रिया या उत्पाद आविष्कार को दिया जाता है, जो कि औद्योगिक उपयोजन (Industrial application) के योग्य हों।

अविष्कार नवीन एवं उपयोगी होने चाहिये । आविष्कार उस कला में निपुण व्यक्ति के लिए प्रत्यक्ष (Obvious) नही होना चाहिए।

आविष्कार को भारत के पेटेंट अधिनियम की धारा 3 के प्रकाश में भी देखा जाना चाहिये। यह धारा परिभाषित करती है कि क्या आविष्कार नहीं होते हैं। किसी बात को आविष्कार तब तक नहीं कहा जा सकता है जब तक वह नवीन न हो। यदि किसी बात का पूर्वानुमान किसी प्रकाशित दस्तावेज के द्वारा किया जा सकता था या पेटेंट आवेदन के प्रस्तुत करने के पूर्व विश्व में और कहीं प्रयोग किया जा सकता था तो इसे नवीन नहीं कहा जा सकता। यदि कोई बात सार्वजनिक क्षेत्र में है या पूर्व कला के भाग की तरह उपलब्ध है तो उसे भी आविष्कार नहीं कहा जा सकता। भारत देश में परमाणु उर्जा से सम्बन्धित आविष्कारों का पेटें‍ट नहीं कराया जा सकता है।

क्या पेटेन्ट कार्यालय पेटेंटेड उत्पाद के ग्राहक ढूंढने में मदद करता ह क्याै ?

पेटेन्ट कार्यालय पेटेंटेड उत्पाद के ग्राहक ढूंढने में कोई मदद नही करता है। पेटेन्ट के वाणिज्यीकरण में पेटेन्ट कार्यालय की कोई भूमिका नहीं होती। किन्तु पेटेन्ट के संबंध में जानकारी पेटेन्ट कार्यालय के जर्नल में छापी जाती है और पेटेन्ट कार्यालय की वेबसाइट पर भी डाली जाती है, जो पूरी दुनिया में आम आदमी की पहुँच में है। इससे पेटेंट आवेदक को लाइसेन्स के भावी उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने में मदद मिलती है।

पेटेन्ट मिलने से पहले किसी उत्पाद पर “पेटेन्ट लंबित” या “पेटेन्ट आवेदित” या “पेटेंट पेंडिंग”अंकित करना कितना उपयोगी है?

पेटेन्ट के लिए आवेदन जमा करने के बाद किसी उत्पाद पर “पेटेन्ट लंबित” या “पेटेन्ट आवेदित” या “पेटेंट पेंडिंग” अंकित करने का आशय जनता को सूचित करना है कि पेटेन्ट के लिए आवेदन पेटेन्ट कार्यालय में लंबित है। किन्तु इन शब्दों का कोई विधिक महत्त्व नहीं है। पेटेन्ट मिलने के बाद ही उसके उल्लंघन को रोकने की कार्रवाई की जा सकती है।

किराये की साइकिल . .

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पहले हम लोग गर्मियों में किराए की छोटी साईकिल लेते थे, अधिकांस लाल रंग की होती थी जिसमें पीछे कैरियर नहीं होता। जिससे आप किसी को डबल न बैठाकर घूमे। एक साईकिल वाले ने तो पिछले मडगार्ड पर धारदार नुकीले कीले तक लगवा दिए थे किराया शायद 50 पैसे प्रति घंटा होता था किराया पहले लगता था ओर दुकानदार नाम पता नोट कर लेता थाा

किराये के नियम कड़े होते थे .. जैसे की हवाई जहाज लेना हो। पंचर होने पर सुधारने के पैसे, टूट फूट होने पर आप की जिम्मेदारी, खैर ! हम खटारा छोटी सी किराए की साईकिल पर सवार उन गलियों के युवराज होते थेा थे, पूरी ताकत से पैड़ल मारते, कभी हाथ छोड़कर चलाते ओर बैलेंस करते, तो कभी गिरकर उठते और फिर चल देतेा

अपनी गली में आकर सारे दोस्त, बारी बारी से, साईकिल चलाने मांगते किराये की टाइम की लिमिट न निकल जाए, इसलिए तीन-चार बार साइकिल लेकर दूकान के सामने से निकलते।

तब किराए पर साइकिल लेना ही अपनी रईसी होती। खुद की अपनी छोटी साइकिल रखने वाले तब रईसी झाड़ते। वैसे हमारे घरों में बड़ी काली साइकिलें ही होती थी। जिसे स्टैंड से उतारने और लगाने में पसीने छूट जाते। जिसे हाथ में लेकर दौड़ते, तो एक पैड़ल पर पैर जमाकर बैलेंस करते।

ऐसा करके फिर कैंची चलाना सीखें। बाद में डंडे को पार करने का कीर्तिमान बनाया, इसके बाद सीट तक पहुंचने का सफर एक नई ऊंचाई था। फिर सिंगल, डबल, हाथ छोड़कर, कैरियर पर बैठकर साइकिल के खेल किए। ख़ैर जिंदगी की साइकिल अभी भी चल रही है। बस वो दौर वो आनंद नही है।

क्योंकि कोई माने न माने पर जवानी से कहीं अच्छा वो खूबसूरत बचपन ही हुआ करता था साहब.. जिसमें दुश्मनी की जगह सिर्फ एक कट्टी हुआ करती थी और सिर्फ दो उंगलिया जुडने से दोस्ती फिर शुरू हो जाया करती थी। अंततः बचपन एक बार निकल जाने पर सिर्फ यादें ही शेष रह जाती है और रह रह कर याद आकर सताती है।

आजकल पेड़ पर लटके हुए आम भी अपनेआप ही गिरने लगे है।

सुना है आज के बच्चों का बचपन तो एक मोबाईल ने चुरालिया।
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ऊपर दिया गया संदर्भ कॉपी पेस्ट है और इसके ओरिजिनल लेखक का पता नही है

How to cancel registered trademark

cancellation of a registered trademark is being termed as ‘Rectification of Register’ under the provisions of The TradeMarks Act, 1999.

The following are the grounds for rectification:

  • Non-use of the Registered Mark
  • Contravention of failure to observe a condition entered on the register
  • Entry made in the register without sufficient cause
  • Entry wrongly remaining on the register or any error or defect in any entry in the register

Indian Patent Data

#IndianPatentData now Available in #PATENTSCOPE
The national patent collection of India is now available in WIPO’s global patent search system #PATENTSCOPE.

Coming soon how to search indian patent data in wipo