Saluting Device patented in 1896 by J. C. Boyl

“Weird and wonderful” historical #patents: “Saluting Device”, patented in 1896 by J. C. Boyle. An invention to help users practice good etiquette

. The device inside the hat would automatically lift and rotate the hat when the user wished to greet, or salute, someone.

Nilambur teak GI543

Nilambur teak (GI-543) from Kerala gets GI tag. It is considered a very valuable wood due to its ability to withstand inclement weather. It is very stable, which means that it does not warp when subjected to variations in humidity and temperature

Extjs getting references

Easy way to get reference in controller

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Trademark Finder Trademark clearance search

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बौद्धिक सम्‍पदा अधिकारों को लागू करने पर नई दिल्‍ली में राष्‍ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन

केन्‍द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने आज यहां बौद्धिक सम्‍पदा अधिकारों को लागू करने के बारे में तीन दिन की कार्यशाला का उद्घाटन वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और गृह राज्‍य मंत्री श्री किरेन रिजिजू की गरिमामयी उपस्थिति में किया।

श्री राजनाथ सिंह ने कार्यशाला को सम्‍बोधित करते हुए कहा कि जाली मुद्रा और पायरेसी संबंधी गतिविधियां गंभीर संगठित अपराधों को बढ़ावा देती हैं। ऐसी गतिविधियां जाली मुद्रा का अवैध कारोबार करने वाले अपराधियों और आतंकवादियों द्वारा चलाई जाती हैं। उन्‍होंने कहा कि इसीलिए पुलिस को पुरी जानकारी और प्रशि‍क्षण के साथ लैस रहना चाहिए ताकि बौद्धिक सम्‍पदा अधिकारों के उल्‍लंघनों पर नियंत्रण लग सके।

केन्‍द्रीय गृह मंत्री ने पुलिस प्रशिक्षण संस्‍थानों तथा देशभर की अकादमियों में अपने बलों को बौद्धिक सम्‍पदा अधिकारों के बारे में संवेदी बनाने के लिए बौद्धिक सम्‍पदा अधिकार प्रशिक्षण मौडयूल शुरू करने की घोषणा की।

श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि विश्‍व बौद्धिक सम्‍पदा संगठन (डब्‍ल्‍यूआईपीओ) प्रौद्योगिकी और नवाचार समर्थन के लिए पंजाब और तमिलनाडू में दो प्रौद्योगिकी और नवाचार समर्थन केन्‍द्र (टीआईएससी) की स्‍थापना सीआईपीएएम के सहयोग से कर रहा है। उन्‍होंने कहा कि लोगों को सुरक्षित भविष्‍य के लिए अपने बौद्धिक सम्‍पदा के सृजन और संरक्षण के उपायों के बारे में समझदारी बढ़ाने की आवश्‍यकता है।

गृह राज्‍य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने लोगों से दूसरों की बौद्धि‍क सम्‍पदा का सम्‍मान करने का आगह किया और देश में बौद्धिक सम्‍पदा अधिकार लागू करने के लिए मजबूत व्‍यवस्‍था बनाने की बात कही।

इस कार्यशाला से देश की प्रवर्तन एजेंसियों को बौद्धिक सम्‍पदा अधिकार लागू करने में अपने महत्‍व को समझने में मदद मिलेगी। यह कार्यशाला अधिकारियों को अपने अनुभव साझा करने, श्रेष्‍ठ व्‍यवहारों का आदान-प्रदान करने और बौद्धिक सम्‍पदा अधिकारों को लागू करने के मामले में बेहतर अंतर-एजेंसी समन्‍वय के मंच के रूप में कार्य करेगी। तीन दिन की इस कार्यशाला में प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधियों के अतिरिक्‍त अनेक बौद्धिक सम्‍पदा क्षेत्र के पेशेवर लोगों, वकील, कानून के विद्यार्थी तथा उद्योग संघों के लोग भाग ले रहे हैं।

यह कार्यशाला 22 से 24 अगस्‍त, 2017 तक भारत सरकार के वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय के औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के अन्‍तर्गत पेशेवर संस्‍था बौद्धिक सम्‍पदा अधिकार संवर्धन और प्रबन्‍धन (सीआईपीएएम) द्वारा आयोजित की गई है।

Intellectual property right policy india राष्‍ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति

‘रचनात्‍मक भारत: अभिनव भारत’

केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने कल राष्‍ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति को मंजूरी दे दी। इस कदम से भारत में बौद्धिक संपदा के लिए भावी रोडमैप तैयार करने में सहायता होगी। इस नीति से भारत में रचनात्‍मक और अभिनव ऊर्जा के भंडार को प्रोत्‍साहन मिलेगा तथा सबके बेहतर और उज्‍जवल भविष्‍य के लिए इस ऊर्जा का आदर्श इस्‍तेमाल संभव होगा।

राष्‍ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति एक विजन दस्‍तावेज है, जिससे समस्‍त बौद्धिक संपदाओं के बीच सहयोग संभव बनाया जाएगा। इसके अलावा संबंधित नियम भी तैयार किये जाएंगे। इसके जरिए कार्यान्‍वयन, निगरानी और समीक्षा से संबंधित संस्‍थागत प्रणालियों को लामबंद करने के लिए सहायता होगी। नीति से सरकार, अनुसंधान एवं विकास संगठनों, शिक्षा संस्‍थानों, सूक्ष्‍म, लघु, मध्‍यम उपक्रमों, स्‍टार्ट अप और अन्‍य हितधारकों को शक्ति संपन्‍न किया जाएगा, ताकि वे अभिनव तथा रचनात्‍मक वातावरण का विकास कर सकें।

इस नीति के तहत इस बात पर बल दिया गया है कि भारत बौद्धिक संपदा संबंधी कानूनों को मानता है और बौद्धिक संपदा की सुरक्षा के लिए यहां प्रशासनिक तथा न्‍यायिक ढांचा मौजूद है। इसके तहत दोहा विकास एजेंडा और बौद्धिक संपदा संबंधी समझौते के प्रति भारत की प्रतिबद्धता प्रदर्शित होती है।

बौद्धिक संपदा अधिकारों का महत्‍व पूरे विश्‍व में बढ़ रहा है, इसलिए यह आवश्‍यक है कि भारत में इन अधिकारों के प्रति जागरूकता बढा़ई जाए। बौद्धिक संपदा अधिकारों के साथ वित्‍तीय और आर्थिक पक्ष भी जुड़े हुए हैं। इसके लिए घरेलू स्‍तर पर आईपी फाइलिंग और पेटेंट की वाणिज्यिक स्थिति के बारे में भी जानकारी आवश्‍यक है।

राष्‍ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति के मुख्‍य बिन्‍दु इस प्रकार हैं –

विजन घोषणा – भारत में सबके लाभ के लिए बौद्धिक संपदा को रचनात्‍मक और अभिनव आधार मिलता है। भारत में बौद्धिक संपदा से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला, संस्‍कृति, पारम्‍परिक ज्ञान और जैव विविधता संसाधनों को प्रोत्‍साहन मिलता है। भारत में विकास के लिए ज्ञान मुख्‍य कारक है।

मिशन घोषणा – भारत में शक्तिशाली, जीवंत और संतुलित बौद्धिक संपदा अधिकार प्रणाली से रचनात्‍मकता और नवाचार को सहायता मिलती है, उद्यमशीलता को प्रोत्‍साहन मिलता है तथा सामाजितक-आर्थिक एवं सांस्‍कृतिक विकास को बढ़ावा मिलता है। इसके जरिए स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षा को बढ़ाने में मदद मिलती है। अन्‍य महत्‍वपूर्ण सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी महत्‍व भी इससे जुड़े हुए हैं।

लक्ष्‍य – इस नीति के निम्‍नलिखित सात लक्ष्‍य हैं –

1. बौद्धिक संपदा अधिकार जागरूकता : पहुंच और प्रोत्‍साहन – समाज के सभी वर्गो में बौद्धिक संपदा अधिकारों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्‍कृतिक लाभों के प्रति जागरूकता पैदा करना।

2. बौद्धिक संपदा अधिकारों का सृजन- बौद्धिक संपदा अधिकारों के सृजन को बढ़ावा।

3. वैधानिक एवं विधायी ढांचा – मजबूत और प्रभावशाली बौद्धिक संपदा अधिकार नियमों को अपनाना, ताकि अधिकृत व्‍यक्तियों तथा बृहद लोकहित के बीच संतुलन कायम हो सके।

4. प्रशासन एवं प्रबंधन – सेवा आधारित बौद्धिक संपदा अधिकार प्रशासन को आधुनिक और मजबूत बनाना।

5. बौद्धिक संपदा अधिकारों का व्‍यवसायीकरण – व्‍यवसायीकरण के जरिए बौद्धिक संपदा अधिकारों का मूल्‍य निर्धारण।

6. प्रवर्तन एवं न्‍यायाधिकरण – बौद्धिक संपदा अ‍धिकारों के उल्‍लंघनों का मुकाबला करने के लिए प्रवर्तन एवं न्‍यायिक प्रणालियों को मजबूत बनाना।

7. मानव संसाधन विकास – मानव संसाधनों, संस्‍थानों की शिक्षण, प्रशिक्षण, अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत बनाना तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों में कौशल निर्माण करना।

इन लक्ष्‍यों को विस्‍त‍ृत कार्य प्रणाली के जरिए हासिल किया जाएगा। विभिन्‍न मंत्रालयों/विभागों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई की निगरानी डीआईपीपी करेगा। डीआईपीपी भारत में बौद्धिक संपदा अधिकारों के भावी विकास, कार्यान्‍वयन, दिशा-निेर्देश और समन्‍वय करने वाला नोडल विभाग होगा।

राष्‍ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति ‘रचनात्‍मक भारत : अभिनव भारत’ के लिए काम करेगी।

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