पेटेंट का आवेदन किसके नाम से करना चाहिए कंपनी के नाम से या अविष्कारक को खुद के नाम से
भारत देश के बौद्धिक संपदा अधिकार अधिनियम
भारतवर्ष मे निम्न आठ अधिनियम के अन्दर बौद्धिक सम्पदा अधिकार सुरक्षित किये गये हैं
- The Biological Diversity Act, 2002
- The Copyright Act, 1957 (कॉपीराइट)
- The Design Act, 2000.
- The Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act, 1999.
- The Patents Act, 1970.
- The Protection of Plant Varieties and Farmers’ Rights Act, 2001.
- The semiconductor Integrated circuits Layout design Act, 2000.
- The Trade Marks Act, 1999.
कॉम्प्यूटर प्रोग्राम से सम्बंधित भारत देश के पेटेंट कानून
भारतवर्ष में पेटेंट अधिनियम की धारा ३ को २००२ संशोधन के द्वारा संशोधित किया गया है। इसने पेटेंट अधिनियम में धारा ३ (K) को प्रतिस्थापित किया है। इसमें गणित, व्यापार के तरीकों, कंप्यूटर प्रोग्राम अकेले में (Computer Programmer per se), अल्गोरिथम को अविष्कार नहीं माना गया है। यानि कि यह पेटेंट नहीं हो सकते हैं।
यहां ‘कंप्यूटर प्रोग्राम’ को per se के द्वारा प्रतिबन्धित किया गया है। Per se का अर्थ अकेले में या अपने आप में है। इसका अर्थ यह हुआ कि कंप्यूटर प्रोग्राम अपने आप में अविष्कार नहीं है पर इसका यह भी अर्थ हुआ कि यदि वह अकेले में न हो तो अविष्कार माने जा सकते हैं और उसका पेटेंट भी हो सकता है। आगे न्यायालय इसका क्या मतलब निकालेगें – क्या हम अमेरिका की राह जायेंगे या यूरोप की – यह तो केवल भविष्य ही बता सकता है।
क्या कंप्यूटर प्रोग्राम को पेटेंट किया जा सकता है?
कंप्यूटर प्रोग्राम, औद्योगिक प्रक्रिया के साथ हो तो उसे पेटेंट कराया जा सकता है कि नहीं, इस सम्बन्ध में सबसे चर्चित और शायद सबसे विवादित मुकदमा डार्ह केस (Diamond Vs. Diehr, (1981) 450 U.S.. 175: 67 L.E.D. 2d घ/55) है। इस मुकदमे में जिस आविष्कार को पेटंट कराया जा रहा था उसमें कंप्यूटर प्रोग्राम को रबर साफ करने की एक प्रक्रिया के साथ प्रयोग किया गया था। रबर को साफ करने के लिये उसे गर्म किया जाता है उसे कितनी देर गर्म किया जाय यह उसके तापमान पर निर्भर है तापमान ज्यादा तो कम समय के लिये गर्म किया जायेगा यदि तापमान कम तो ज्यादा समय के लिये गर्म किया जायेगा यह आर्हेनियस नियम के अनुसार निश्चित होता है। जिस ढांचे के अन्दर रबर को गर्म किया जाता था उसके अन्दर के तापमान को कंप्यूटर में डाला जाता था जो आर्हेनियस नियम के अनुसार समय की गणना करता था और ठीक समय ढांचे को खोल देता था ताकि रबर बाहर आ जाये। सवाल यह था कि क्या यह आविष्कार था जिसका पेटेंट कराया जा सकता है।
पेटेंट आवेदक के अधिकार ?
पेटेंट किन अविष्कारों के लिए दिया जाता है?
पेटेंट नए प्रक्रिया या उत्पाद आविष्कार को दिया जाता है, जो कि औद्योगिक उपयोजन (Industrial application) के योग्य हों।
अविष्कार नवीन एवं उपयोगी होने चाहिये । आविष्कार उस कला में निपुण व्यक्ति के लिए प्रत्यक्ष (Obvious) नही होना चाहिए।
आविष्कार को भारत के पेटेंट अधिनियम की धारा 3 के प्रकाश में भी देखा जाना चाहिये। यह धारा परिभाषित करती है कि क्या आविष्कार नहीं होते हैं। किसी बात को आविष्कार तब तक नहीं कहा जा सकता है जब तक वह नवीन न हो। यदि किसी बात का पूर्वानुमान किसी प्रकाशित दस्तावेज के द्वारा किया जा सकता था या पेटेंट आवेदन के प्रस्तुत करने के पूर्व विश्व में और कहीं प्रयोग किया जा सकता था तो इसे नवीन नहीं कहा जा सकता। यदि कोई बात सार्वजनिक क्षेत्र में है या पूर्व कला के भाग की तरह उपलब्ध है तो उसे भी आविष्कार नहीं कहा जा सकता। भारत देश में परमाणु उर्जा से सम्बन्धित आविष्कारों का पेटेंट नहीं कराया जा सकता है।
सरकार पेटेंट क्यो देती है?
अविष्कार की सही ओर प्रथम घोषणा (जानकारी) करने के एवज में सरकार निश्चित अवधि (20वर्ष) के लिए पेटेंट देते हैं।
एक तरफ राज्य(सरकार) को नए अविष्कार की जानकारी मिल जाती है व दूसरी तरफ पेटेंट धारक को निश्चित अवधि के लिए एक्सव अधिकार |
पेटेन्ट एजेन्ट से क्या तातपर्य है
पेटेन्ट एजेन्ट भारतीय पेटेन्ट कार्यालय में पंजीकृत व्यक्ति होता है, और पेटेन्ट कार्यालय द्वारा आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उसका नाम पेटेन्ट एजेन्ट रजिस्टर में दर्ज़ किया जाता है। वह निम्नलिखित के लिए पात्र होता है—
(a) नियंत्रक के यहाँ प्रैक्टिस करना और
(b)सभी दस्तावेज दैयार करना, समस्त कार्य एवं ऐसे प्रकार्य निष्पादित करना जो पेटेंट अधिनियम के अंतर्गत कंट्रोलर के यहाँ जारी प्रक्रिया के संबंध में निर्दिष्ट हों।
पेटेन्ट आवेदन के लिए पंजीकृत पेटेन्ट एजेन्ट की सेवाएँ लेना क्या जरूरी है?
नहीं। पेटेन्ट कानून के अंतर्गत पेटेन्ट के लिए आवेदन करने के लिए किसी पंजीकृत पेटेन्ट एजेन्ट की सेवाएँ लेना जरूरी नहीं है। आवेदक अपने-आप या पेटेन्ट एजेन्ट के माध्यम से आवेदन जमा करने के लिए स्वतंत्र है। किन्तु यदि कोई आवेदक भारत का नागरिक न हो तो उसे या तो पंजीकृत एजेन्ट के माध्यम से आवेदन जमा करना होता है या उसे तामील के लिए भारत का कोई पता देना होता है।
